मीठी -सी ख़ुशबू
मीना दीदी की लिखी किताब बँधी हुई खुशबू के साथ साथ मेरी जिन्दगी का सफर
हाइगा
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बच्चों के मुख से
क्षणिका
कविता
Sunday, December 28, 2014
हाइगा
हाइगा
अनिश्चित
कैसे बनेगें हम किसी के जीने का मकसद दोस्त
निश्चित है मकसद की डोर
तेरी मेरी सोच से भी कहीं आगे।
सीमा स्मृति
वक्त
कभी ख़ामोशी लगती है जुबां प्यार की
कौन जाने, कब बन जाये सज़ा प्यार की ।
सीमा स्मृति
Saturday, December 27, 2014
चाँद
जाल
यात्रा
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