Sunday, October 11, 2015

आदत

आदतें भी अजीब हुआ करती  हैं.......
बात करने की आदत
दर्द सुनाने
शिकायत करने
तारिफ सुनने
खुद को साबित करने
इनकार  इकरार प्‍यार करने
मुस्‍कराने 
कुछ कर गुजरने
बोलने
सुनने
खामोश रहने की आदत
फि़कर और जिकर
खुश और दुखी रहने  की आदत
सांसों के चलने तक
रंग बदलती 
दोस्‍तों -आदतें भी अजीब हुआ करती हैं।

सीमा स्‍मृति

जिन्‍दगी

अपनी ही सोच का प्रवाह है- जिन्‍दगी
इस  क्षण नाम है -जिन्‍दगी
कुदरत का करिश्‍मा है - जिन्‍दगी
सांसो की लय है - जिन्‍दगी 
शब्‍दों में कब बंधी है- जिन्‍दगी
ऐ दोस्‍त 
वक्‍त की सलीब पे हैरान है- जिन्‍दगी ।
सीमा स्‍मृति

Saturday, September 12, 2015

हाइकु

प्रेम की बात
निशब्‍द एहसास
मौन स्‍वीकृति।

डर के तार
सोखते एहसास
दर्द सलीब ।


सीमा स्‍मृति 

क्षणिकाएँ

खोज  दीवानी
आँखों
साँसों
रिश्‍ते-नातों
जिन्‍दगी की बातों में
इंसानों
मकानों
दुनिया की दुकानों में
 खोज रही
कौन सी छवि
सीमा स्‍मृति

Wednesday, June 3, 2015

ख़ामोशी

1

तेरी ख़ामोशी

अल्हड़ नवेली-सी

बनी पहेली ।

2

दर्द से मीठी

ये ख़ामोशी की दवा

स्वाद कड़वा ।

3

कौन सुनेगा

ख़ामोशी की आवाज

शोर के साज!

4

पी ली ख़ामोशी

घुली मीठी मुस्कान

करे हैरान ।

5

ख़ामोशी– संग

बदले हर छिन

जीवन– रंग ।

6

बजने लगी

ये तेरी ख़ामोशियाँ

ज्यों शहनाई।

7

धड़कन भी

दे ख़ामोशी की ताल

करती धमाल।

8

नैना समाए

यूँ ख़ामोशी के साये

कैसे छिपाएँ!

9

छूटा  वो गाँव

मूक राह निहारे

सदा पुकारे।

10

ये ख़ामोशियाँ

गजब जादूगर

देख असर ।

-0-

धूप के पाँव

हर दिशा में

मृग  मरिचिकाऍं 

कैसे बचाएँ ।

2

शुष्क  रिश्तों-सी

मुरझाई   लताएँ

खोजें  आर्द्रता।

3

जल  -अभाव

पड़ने  लगा प्रभाव

समझे  भाव ।


सीमा स्मृति 

Friday, May 8, 2015

मन के द्वार


1
मन का पंछी
पाने को पहचान
भरे उड़ान ।
2
मन है देता
जीवन आधार
मंत्र अपार।
3
मन की आंखे
खोले हजारों द्वार
करो विचार ।
4
देखे दुनिया
मीन सी तड़पन
है दु:खी मन ।
5
मीठी लगे हैं
ये मन की बतियाँ
बांटे सखियाँ ।
6
ये बाल मन
बिन बात मुस्‍काये
दर्द भुलाये।
7
मन की ताल
दूजे से मिल जाती
मंत्र सुनाती ।
8
दर्द सोखता
यूँ रेत सोखे पानी
मन ने ठानी । 
9
देखे जो रंग
मचले मनमौजी
तितली मन ।

10
यूँ बिच्‍छू बन
ये जहरीला मन
सोखता तन ।
11
शब्‍दों के तीर
मज़बूरी की बेड़ी
मन ना छोड़े ।

सीमा स्‍मृति