Sunday, January 17, 2016

प्रश्‍न

1

चहकी बया,

चौंका शिकारी,अब

तेरी है बारी ?

2

रोज रावण

रूप बदल सताते

आये न राम ?

3

वो आवाज थी

जादुई सी,क्योंकर

चुभे तीर-सी ?

4

धर्मो के नाम

सवालों का सैलाब

करे प्रहार ?

5

जख्‍मी समाज

क्‍यों न उठे सुनामी

प्रश्‍न बेमानी ?

6

भीड़ का हिस्‍सा

दर्द का एहसास

ये अर्ध सत्‍य ?

7

घायल पंछी

जहरीले ये तीर

क्‍यों चारों ओर ?

8

ये शर्मसार

मानवता,धिक्‍कारे

कब जागोगे ?

9

Wednesday, January 6, 2016

मीठी खुशबू

1
वक़्त ने खोली
अनुभव पिटारी
मिली ख़ुशबू।
2
शिशु ख़ुशबू
चहकती आँगना
गाती तराने।
3
स्वर्ग-नर्क ?
ईमानदार लम्हा
जीवन अर्क।
4
साँसों में बसे
जिन्दगी की मिठास
सत्य जो साथ।
5
मन बगिया
मीठी-सी खुशबू ले
रही इठला। 
6
यूँ मिली दिशा
धुली गई मिठास
शक्ति विश्वास।

सीमा स्‍मृति

मुलाकात

तुझसे मिलना
इक रवायत नहीं
किसी उम्र का
महकता सुरूर भी नहीं
बदली हवाओं में
थमा सा कोई नशा भी नहीं ।
तुझ से मिलना
जिन्दगी में मिले छालों को,
अपने ही हाथों से मरहम लगाना -सा
दर्पण में अक्स की पहचान सा
रात के बाद दिन से मुलाकात -सा
यथार्थ के टुकडों को सँजोना -सा
अतीत में थमे एहसास सा लगता है मुझे ।



भोर

1
भोर का शोर
यूँ घोलता मिठास
झूमे आकाश।
  2
भोर का रंग
दे उम्मीदों के पंख
भरो उड़ान ।
3
यूँ गई साँझ
सूरज को  दे काज
लाये उजास ।
4
ख़ामोश भोर
लिये मीठी मुस्कान
हरे थकान।
5
भोर सहेली
तुम नहीं अकेली
थमो हथेली।
6
झाँकती भोर
लगी गुनगुनाने
मीठे तराने।
7
खोजती आँखें
करती इंतजार
भोर त्‍यौहार ।
8
भोर -आँगना
सजा नया सपना
होगा अपना ।
9
कहे ये भोर
हों मज़बूत स्तम्भ
न करें दंभ।
10
कहती भोर
भौंरे सी खोज रही
आस का फूल। 

11
 नन्हें शिशु-से
है लगे मचलने
नये सपने।