Wednesday, February 16, 2011

सर्दी


सर्दी का अर्थ,
गरम रजाई में
कविता करते शब्‍दों में नहीं, ठिठुरता,
ऐस्‍सी कारो के दरवाजों से नहीं झंकता,
शरीरों की गर्मी से नहीं मिटता,
सर्दी के लिए सरकारी इंतजामों की डीगो से नहीं, ढकता
सर्दी का अर्थ,
भूख्‍ो पेट
सूखे बदन,
बिना छप्‍पर,
फटी शाल लिए,
सुबह अखबार और इंटरनेट के किसी कोने में
' शीत लहर से पांच की मृत्‍यु '
सिर्फ अपने अर्थ खोजता है।
सीमा 'स्‍मृति'

Sunday, February 13, 2011

युग

यूज एंड थरो की संस्‍कृति 
प्रयोग करो और फेंक दो
डिब्‍बे, इंसान या भावनाएं
इन्‍हें साथ लेकर चलना आसान है
उससे भी ज्‍यादा आसान है फेंक देना ।
जितना चाहो प्रयोग करो 
प्रयोग करने की नियामावली तुम्‍हारी अपनी है ,
एक इंसानी बम से उड़ सकते हैं 
हजारो इंसानो के चिथड़े
डिब्‍बों की तो की क्‍या बिसात है।
भावानाएं उनका क्‍या
जिन्‍दगी बदलती है, 
बदलती हैं जरूरतें
मंत्र एक है, वर्तमान में जियो
फिर कुछ भी बदलो या फेंको
भावानाए क्‍या चीज हैं
ये संस्‍‍कृति है इकसवीं सदी की
रूको मत बढते जाओ
चाहे बहाने पड़े , मगरमच्‍छ के आंसू
प्रयोग करो 
डिस्‍पोजेबल रूमाल और फेंक दो,
मुस्‍कराओ और बढ़ते चलो
यूज एंड थरो की संस्‍कृति

सीमा स्‍मृति
‘समय की धारा’
गम के साये में समझ पाये,
कौन अपने हैं कौन है पराये।
पिघली बर्फ,नदी हो गई,
मिल सागर से, तूफान में तबदील हो गई,
सागर के हिस्‍से सिर्फ इलजाम हैं आएं।
निगल गई,धुंआ उगलती चिमनियां,
तारे आसमान के,
कुदरत के रंग है निराले, लोग कहते हैं आए,
अपनी करनी कब समझ हैं पाये।
आतंकवाद, आतंकवाद का गाना जो हैं, गाते आज,
शब्‍द उन्‍हीं ने हैं पिरोये,
सुर भी उन्‍हीं ने हैं लगाये,
धुन हो गई मतम की, कौन, किसे, क्‍या समझाये ।
बन्‍द है एक ‘कसाब’ कैद में,
यूं लगता है, दिलो में कैद हैं ‘कसाब’ ही के साये ।
सीमा ‘स्‍मृति’

Thursday, December 30, 2010

साथियों नये दशक ने दी है दस्‍तक ,
कुछ तो मुस्‍कराओ,
कम करो शिकायतें,
कुछ तो परिवर्तन लाओ,
करो मनन,
बम कम, इंसानियत कुछ तो बढाओ,
नव वर्ष की शुभकानाएं
सभी के लिए शुभ बनाओ।

Wednesday, April 14, 2010

फंडा

आज का युग फंडो पर आधारित है । कृपया अपना अपना फंडा शेयर करें और जीवन के आंनद का मजा ले ।