Saturday, November 30, 2013

रिटायरमेंट


   1
पचास पार
पनपे ये इंतजार
क्‍या होगा यार।
   2
धूप आंगना
होगा अब आराम
आया विराम ।
   3
वो घड़ी आई
संधर्ष ले बिदाई
देगा बधाई।
    4
प्रश्‍न कटीले
पूर्णता-अपूर्णता
चैन ले जाते ।
    5
ये टिक टिक
होगी दर्द की टीस..
सुख की सांस....?
     6
सहमे क्षण
लगे हैं मुस्‍कराने
हो सुनहरे ।
     7
आई पेंशन
नया एक्‍सटेंशन
नहीं टेंशन।


बिटिया

   1
माँ ! माई! मम्‍मी
बिटिया पुकारती
मैं इठलाती ।
   2
है घर द्वार
बजती शहनाई
ये रानी आई। 
    3
तेरे आने से
मिली मुझे उड़ान
ये पहचान।
    4
ये चिरइया
यूँ ना काटो, पर
जीने दो पल ।
   5
गर्वित हुआ
घर द्वार जो भया
जन्‍म तुम्‍हार।



आंखे

खामोश बोलें
   ये राज हर खोलें
   बोलती आंखें ।
2 नैनों की भाषा
  है अजब पहेली
  बूझ सहेली ।
3 दर्द से भरी
  आंसुओं को हैं,थामे
  क्‍यों मुस्‍कराती ।
4 चपल नैना
  सुनाये है, कहानी
  मुंह जुबानी ।
5 मृग नैना
  छीनें मन का चैना
  ये दिन रैना ।
6 बन आईना
  करती ये बयान
  हर दर्शन।
7 नैन पिंजरा
  मन, मोहक पंछी
  करे सवाल ।
8 ये अंग संग
  हैं, जीवन तरंग
  देखो ये, रंग।


     

Wednesday, November 27, 2013

यूँ हुआ

माना  तेरी थी मजबूरियाँ
क्‍या किस्‍मत है
टकराना था उनको
मेरी ही  मोहब्‍बत के साथ ।
२७.११.२०१३

अपनापन

सुना करते थे
ओैरों
की बेवफाई के किस्‍से
खुद पर जो गुजरी
कोई क्‍या सुनता
अपने ही अश्‍क साथ छोड़ गए।
२७.११.२०१३

उस पार

कल तेरी आँखों में नींद नहीं थी
आज मेरी से है,गायब
दो किनारे ही अक्‍सर,जीते हैं
इक ही हकीकत ।
२७.११.२०१३


Tuesday, November 26, 2013

इलाज

क्‍या हुआ सर, आप आज आफिस के लिए लेट कैसे हो गए ?
अरे मैडम क्‍या बताये, आप तो जानती हो घर में हम सभी नौकरी करते हैं। ऐसे में नौकर भी पालना पड़ता है। बस उसी नौकर को बुखार हो गया। उसे डाक्‍टर के पास ले कर गया था इसी कारण लेट हो गया। उसे वापिस ऐजेंसी वालों के पास भी तो नहीं भेज सकते वरना पता नहीं वापिस आये या नहीं।
हां सर, ये तो है।
अब डाक्‍टर ने उसे ढेंगू बताया है। खून टेस्‍ट करवाया, प्लटेलेट थोड़े कम आये हैं।
सर कितने हैं ?
यही तीस हजार।
सर, ये तो बहुत कम हैं ।
मैडम, हम उसको दवाई के साथ ताजा जूस, दूध सब दे रहे हैं। ऐजेंसी वाले क्‍या ख्‍याल रखते जो हम रख रहे हैं। ठीक हो जाएगा । उस के बिना हमारा भी तो गुजारा नहीं हो सकता।  कुछ नहीं होगा। तीन चार दिन का  टाइम तो लगेगा पर ठीक हो जाएगा। मैनें  अखबार में पढ़ा था कि इस बार दिल्‍ली में ढ़ेगू से  मरने वालों की संख्‍या बहुत ही कम है।

सीमा स्‍मृति
30.10.2013